क्या गुजरात में बन रहे हैं फर्ज़ी लॉकडाउन पास? कलेक्टर का आरोप- भेड़-बकरियों की तरह सूरत से सतना पहुंचे मज़दूर

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क्या गुजरात में बन रहे हैं फर्ज़ी लॉकडाउन पास? कलेक्टर का आरोप- भेड़-बकरियों की तरह सूरत से सतना पहुंचे मज़दूर

भोपाल:

Coronavirus Lockdown: मध्यप्रदेश में हर दिन हजारों मजदूरों को वापस लाने का सरकारी दावा है, लेकिन कई मजदूर चोरी छिपे भी अलग-अलग जिलों में वापसी कर रहे हैं. इनसे हजारों की वसूली हो रही है और इन्हें भेड़ बकरियों की तरह ट्रकों में ठूंसकर लाया.जा रहा है. सतना में ऐसे ही ट्रक ड्राइवरों को पकड़ कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. सूरत से सतना की दूरी लगभग 1100 किलोमीटर है, जो तस्वीरें आई हैं उसमें साफ दिख रहा है कि कहीं कोई सोशल डिस्टेंसिंग नहीं है, जान जोखिम में डाला जा रहा है, मज़दूर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने मेहनत की कमाई के हजारों गंवा दिये ताकि किसी तरह गांव पहुंच जाएं.

सतना पहुंचे एक मज़दूर ने कहा प्रति व्यक्ति कोई 4000 कोई 3200, 3500 ले रहा है. परमिट बनवाना पड़ता है कलेक्टर दफ्तर के पास जाकर, गरीब आदमी क्या करेगा.

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जब उनसे पूछा गया कि सरकार इंतज़ाम तो कर रही है तो उन्होंने कहा .. काहे की सरकार यहां भी सरकार वहां भी सरकार है, लेकिन हम अपने पैसों से आए हैं. सतना पहुंचे ऐसे ही एक ट्रक ड्राइवर की मानें तो गुजरात में सरकारी अधिकारी और पुलिस के लोग ठेकेदारों के साथ मिलकर बॉर्डर पर उन्हें ट्रकों में भरकर भेज रहे हैं. ट्रक ड्राइवर आलमगीर ने बताया कि वो लोगों को सूरत से लेकर आए हैं, 51 लोग उनके ट्रक में सवार थे, वहां ट्रांसपोर्ट वालों ने उन्हें लिस्ट और पैसे दिये लोगों को छोड़ने के लिए.

वहीं सतना में ज़िला प्रशासन को लगता है कि गुजरात में कोई गिरोह सक्रिय है जो फर्जी कागजातों से इन लोगों को सीमा पार भेज रहा है. सतना कलेक्टर अजय कटेसरिया ने कहा, ‘हमारे यहां से ई-पास का सिस्टम है जो शासन की नीति के अनुरूप हो रहा है. हमारी गाड़ी को कोई पकड़ता है तो वेबसाइट से उसकी पुष्टि की जा सकती है, लेकिन गुजरात से जो पास आए हैं हम उनको फर्जी मान रहे हैं क्योंकि उनमें ना कोई नंबर है, एक ही पास में अलग-अलग दस्तख्त हैं. कोई ई रिकॉर्ड नहीं है. मुझे सही नहीं लग रहा है.’

मध्यप्रदेश सरकार का दावा है कि अभी तक वो अलग-अलग राज्यों से 64000 से ज्यादा श्रमिकों की घर वापसी करवा चुकी है, लेकिन कई मजदूर खुद से वापस आए हैं. अकेले सतना में पिछले 7-8 दिनों से हर दिन 9-10 ट्रक और बसें आ रही हैं जिसमें औसत 60 सवारी होती है. इन लोगों के नाम कहीं दर्ज नहीं हैं लेकिन एक गाड़ी के लिये डेढ़ से दो लाख वसूले जा रहे हैं. डर ये भी है कि अगर इसमें से कोई भी संक्रमित हुआ तो उसके संपर्क को ढूंढना बहुत मुश्किल होगा.

(सतना से ज्ञान शुक्ला के इनपुट के साथ)





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