ज़रूरतमंदों के हाथ में दें पैसे, हर एक को मिले अस्थायी राशन कार्ड : नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने दिए टिप्स

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ज़रूरतमंदों के हाथ में दें पैसे, हर एक को मिले अस्थायी राशन कार्ड : नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने दिए टिप्स

राहुल गांधी ने अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी से की बातचीत

नई दिल्ली:

कोरोनावायरस (Coronavirus) के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत की अर्थव्यवस्था भी पटरी से उतर गई है. आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए सरकार ‘जान भी जहान भी’ की नीति पर काम कर रही है. नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी के साथ राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की बातचीत में बनर्जी का सबसे ज़्यादा ज़ोर इस बात पर रहा कि सरकार लोगों के हाथ में पैसा दे. बैनर्जी का मानना है कि लोगों की क्रय शक्ति बनी रहनी चाहिए और उनका यह भरोसा भी बना रहना चाहिए कि जब लॉकडाउन खुलेगा तो उनके हाथ में पैसा होगा. इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को पैसा दे. 

बनर्जी ने लोगों के हाथ में पैसा देने के अलावा अस्थायी राशन कार्ड बनने का सुझाव भी दिया है. उन्होंने कहा कि गरीबों और जरूरतमंदों के लिए अनाज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी राशन कार्ड की व्यवस्था की जानी चाहिए वो भी बिना किसी पहचान के. जो भी आए उनको राशन कार्ड जारी करे गरीबों तक पहुंचने की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है. 

अर्थशास्त्री बनर्जी ने राहुल गांधी से कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए ‘आधार’ आधारित दावों से गरीबों की कई मुश्किलें हल हो गई होतीं. गरीबों का बड़ा समूह अब भी व्यवस्था का हिस्सा नहीं है. हर किसी को अस्थायी राशन कार्ड दें. इनका इस्तेमाल उन्हें रुपये, गेंहू और चावल देने के लिए करें. 

बनर्जी ने कहा कि मांग को फिर से जीवित करना महत्वपूर्ण है, निचले तबके के 60 प्रतिशत लोगों को ज्यादा देने से कुछ बुरा नहीं हो जाएगा. भारत को प्रोत्साहन पैकेज की जरूरत है; हमने अब तक पर्याप्त आर्थिक पैकेज नहीं दिया है. बनर्जी से राहुल गांधी ने आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से बातचीत की थी.



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